
हर्बल तेल, औषधियुक्त दूध अथवा मक्खन और क्वाथ को ललाट/संपूर्ण शरीर में खास तरीके से लगाया जाता है। विविधताओं में शामिल हैं, ऊर्ध्वांग धारा (आंख, कान और त्वचा के रोगों के लिए अच्छा माना जाता है) टकरा धारा (स्मृतिलोप, गंभीर सिरदर्द और विक्षिप्तता से ग्रस्त रोगियों के लिए) और सर्वांग धारा (सिर और शरीर दोनों के लिए)।
अस्थि-संधिशोथ, ल्युकेमिया इत्यादि के उपशमन हेतु उपचार। (स्नेहपानम):
औषधियुक्त घी का प्रयोग आंतरिक रूप से धीरे-धीरे बढ़ती हुआ मात्रा में विशेष अवधि के लिए किया जाता है।
नाक, मुंह, और गले का सूखापन, गंभीर सरदर्द, चेहरे का पक्षाघात, और सर में जलन के लिए उपचार। (सिरोवस्ती):
सर में लगे चमड़े की टोपी में गुनगुना हर्बल तेल डाल कर चिकित्सक की सलाह के अनुसार विशेष अवधि तक छोड़ दिया जाता है।
स्पॉन्डिलाइसिस, वातरोग जैसे अर्थ्राइटिस, लकवा, अर्धांगघात, स्नायु दोष और विकार के उपचार। (पिझिचिल):
स्वच्छ और नए लिनेन की मदद से गुनगुना हर्बल तेल प्रशिक्षित मसाज कर्मियों द्वारा संपूर्ण शरीर पर 7 से लेकर 21 दिनों तक प्रतिदिन 1 से 1.5 घन्टे तक तालबद्ध तरीके से लगाया जाता है।
अर्धांगघात (हेमीप्लेजिया), लकवा और कुछ खास प्रकार के वातरोगों का उपचार। (उद्वर्तनम):
हर्बल पाउडर द्वारा उपचारात्मक मालिश।
आघात अथवा दुर्घटना के कारण उत्पन्न मस्क्युलोस्केलेटल रोग का उपचार। (मर्म चिकित्सा):
उपचार जो शरीर के अत्यंत संवेदनशील महत्वपूर्ण अंगों के लिए किया जाता है। (107 मर्म).
नासिका संबंधी रोग के लिए उपचार। (नस्यम):
औषधियुक्त हर्बल उत्पादों, काढ़ा तेल और घी इत्यादि के अंत:श्वसन से सिर और गले के क्षेत्र से रोग के कारक दूर होते हैं।
कान के रोगों का उपचार। (कर्णपूरणम):
कानों की सफाई और विशेष रोगों के उपचार के लिए औषधियुक्त तेल का प्रयोग प्रतिदिन 5 से 10 मिनट तक किया जाता है।
मोतियाबिंद की रोकथाम और दृष्टि क्षमता को बढ़ाना। (तर्पणम):
आंखों का उपचार मोतियाबिन्द की रोकथाम और ऑप्टिक नर्व को मजबूत बनाने में प्रभावकारी होता है।
मांसपेशियों का अपक्षय, वातरोग, खेल के दौरान होने वाले जख्म, जोड़ों के दर्द, शरीर अथवा शरीर के अंगों की दुर्बलता तथा विशेष प्रकार के त्वचा रोगों के लिए उपचार। (न्जावरकिझी)
गोलों के रूप में मलमल की थैलियों में बंधे औषधियुक्त चावल के पैक के बाह्य अनुपयोग द्वारा संपूर्ण शरीर से पसीना निकाला जाता है।
**कृपया ध्यान दें:
- परीक्षण के बाद आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग कार्यक्रम निर्धारित किए जाते हैं।
- मामूली रोगों जैसे पीठ का दर्द, मांसपेशियों के दर्द इत्यादि के लिए हर्बल स्टीम बाथ, स्पाइनल बाथ और उपचारात्मक मालिश द्वारा अल्पावधिक उपचार केवल चिकित्सक की सलाह पर प्रदान किए जाते हैं।
- महिलाओं की मालिश अथवा अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए महिला विशेषज्ञ होती है।
- अत्यंत वृद्ध व्यक्तियों, अशक्त शिशुओं (7 साल की उम्र से कम), हृदय रोगियों और गर्भवती महिलाओं के लिए कुछ कार्यक्रम उपयुक्त नहीं होते।
- यदि आपके हृदय संबंधी समस्याओं, रक्तचाप, रक्त शर्करा, पुराने त्वचा रोग अथवा अस्थमा का कोई पिछला चिकित्सा-इतिहास है तो कृपया अपने चिकित्सक को इसकी सूचना अग्रिम रूप से दें।
- अग्रिम आरक्षण की सलाह दी जाती है।