जनता
केरल के अधिकांश लोगों की मातृभाषा मलयालम है, जो द्रविड परिवार की प्रमुख भाषा है । यहाँ आर्य, अरबी, यहूदी तथा मिश्रित वंश के लोग भी रहते हैं । दूसरा प्रमुख वर्ग आदिवासियों का है । ये सभी वर्ग मिलकर आधुनिक केरलीय समाज का निर्माण करते हैं । एक राज्य के रूप में केरल की स्थापना 1961 से ही हुई । किन्तु वर्तमान केरल के अन्तर्गत जितने प्रदेश हैं उन प्रदेशों की जनगणना 1881 में ही तैय्यार हो पाई । प्रमाणों के आधार पर यह विश्वास किया जाता है कि 17 वीं सदी के प्रारंभ में केरल की जनसंख्या लगभग 30 लाख थी । 1850 में यह 45 लाख हो गई । 1881 से जनसंख्या लगातार बढ़ती रही । 1901 में जनसंख्या 64 लाख थी जो 1991 में 291 लाख हो गई । (6) 2001 की जनगणना के अनुसार केरल की जनसंख्या 31841374 है ।
केरल के प्रमुख धर्म हैं हिन्दू, ईसाई एवं इस्लाम धर्म । बौद्ध, जैन, पारसी, सिक्ख, बहाई धर्मावलम्बी लोग भी यहाँ रहते हैं । हिन्दू समाज विविध जातियों से बना है । ईस्वी सन् 8 वीं सदी से केरल में जाति-व्यवस्था प्रचलित हुई थी । अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति तक विभिन्न श्रेणी के लोगों को जाति - व्यवस्था के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया । जाति व्यवस्था के कारण समाज में ऊँच - नीच की भावना तथा सामाजिक कुरीतियाँ प्रचलित हो गईं । 19 वीं शताब्दी के अंत में चलने वाले सामाजिक नवोत्थान अभियानों ने 20 वीं शताब्दी में तथा तत्पश्चात् स्वतंत्रता संग्राम में जाति व्यवस्था को किसी सीमा तक तोड़ा । वर्तमान केरलीय समाज में यद्यपि ऊँच - नीच का भेदभावना नहीं है, लेकिन जाति - व्यवस्था मौजूद है।
विभिन्न धर्मावलम्बी लोगों के देवालयों तथा उनके धार्मिक आचार - अनुष्ठानों ने केरलीय संस्कृति को पुष्ट किया है । साहित्य और कला के विकास में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है । मन्दिरों से जुड़े उत्सवों ने केरलीय संस्कृति की शोभा बढ़ायी है ।