जिफरी मस्जिद – आंतरिक भाग | चेरमान जुमा मस्जिद - जटिल शिल्प कौशल | चावक्काड मस्जिद महोत्सव


जिफरी मस्जिद – आंतरिक भाग

जिफरी मस्जिद – आंतरिक भाग

जिफरी मस्जिद का आंतरिक भाग दीपों की पंक्तियों से जगमगाता है और पांडुलिपियों से भरी अलमारियों से सजा है। इसके मध्य में एक प्रतिष्ठित सूफी संत शेख सैय्यद जिफरी का मकबरा है। 18वीं शताब्दी में निर्मित यह मस्जिद आज भी एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र है। मुस्लिम और गैर-मुस्लिम दोनों ही तरह के श्रद्धालु आशीर्वाद लेने आते हैं, जो मलबार के सूफी प्रभाव और सांप्रदायिक सद्भाव के समृद्ध इतिहास को दर्शाता है।

चेरमान जुमा मस्जिद - जटिल शिल्प कौशल

चेरमान जुमा मस्जिद - जटिल शिल्प कौशल

कोडुन्गल्लूर में स्थित चेरमान जुमा मस्जिद के आंतरिक भाग अलंकृत लकड़ी के हैं। ये आंतरिक भाग केरल की पारंपरिक शिल्पकला को इस्लामी वास्तुकला में रूपांतरित करते हैं। मस्जिद में जटिल नक्काशीदार पैनल, पॉलिश किए हुए स्तंभ और पुष्प आकृतियाँ हैं। ये तत्व स्थानीय कलात्मकता और अरब प्रभावों के सम्मिश्रण को दर्शाते हैं। माना जाता है कि यह भारत की पहली मस्जिद है और इसका निर्माण 629 ईस्वी में हुआ था। यह संरचना सदियों पुराने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्थापत्य विरासत को संजोए हुए है।

चावक्काड मस्जिद महोत्सव

चावक्काड मस्जिद महोत्सव

तृश्शूर की चावक्काड जुमा मस्जिद में वार्षिक उरूस के दौरान सजे हुए रथ और विशाल जनसमूह की रौनक देखते ही बनती है। इस अवसर पर हज़ारों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। यह उत्सव पूज्य संतों के सम्मान में मनाया जाता है। इसमें भव्य जुलूस और सामूहिक प्रार्थनाएँ भी शामिल होती हैं।

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