ताष़त्तंगाडि जुमा मस्जिद - लकड़ी का अंदरूनी हिस्सा | मालियेक्कल तरवाड |


ताष़त्तंगाडि जुमा मस्जिद - लकड़ी का अंदरूनी हिस्सा

ताष़त्तंगाडि जुमा मस्जिद - लकड़ी का अंदरूनी हिस्सा

कोट्टयम में मीनच्चिल नदी के तट पर स्थित, ताष़त्तंगाडि जुमा मस्जिद भारत की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है, और माना जाता है कि यह 1,000 साल से भी ज़्यादा पुरानी है। मलिक दीनार के पुत्र हबीब दीनार द्वारा निर्मित, यह मस्जिद अपनी मंदिर-शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें एक चौकोर आंतरिक प्रांगण, सुंदर नक्काशीदार लकड़ी की नुकीली छत और जालीदार खिड़कियाँ हैं। यह मस्जिद केरल की पारंपरिक तच्चु शास्त्र बढ़ईगीरी का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।

मालियेक्कल तरवाड

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तलश्शेरी में स्थित मालियेक्कल हाउस का निर्माण 1919 में कडंकण्डि कुट्टियामु हाजी ने करवाया था। इस विरासती हवेली में 16 से ज़्यादा कमरे, अलंकृत लकड़ी का काम, झूमर और पैटर्न वाली टाइलें हैं, जो अपने ज़माने की भव्यता और शिल्प कौशल को दर्शाती हैं। इस घर को सामाजिक सुधार के प्रतीक के रूप में भी याद किया जाता है। इसकी सबसे वरिष्ठ सदस्य, पी. एम. मरियुम्मा ने उस समय मुस्लिम महिलाओं के लिए शिक्षा और रोज़गार के अवसरों की शुरुआत की, जब ऐसे अवसर दुर्लभ थे।

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