माप्पिला बोली, जिसे माप्पिला मलयालम और अरबी मलयालम के नाम से भी जाना जाता है, केरल के माप्पिला मुस्लिम समुदाय द्वारा बोली जाने वाली मलयालम का एक अलग रूप है।यह बोली या उपभाषा विभिन्न भाषाई प्रभावों के मिश्रण के लिए जानी जाती है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और अरबी भाषी व्यापारियों और मिशनरियों के साथ इसके ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती है।

माना जाता है कि अरबी मलयालम की उत्पत्ति 7वीं शताब्दी ई.या 10वीं शताब्दी ई.की शुरुआत में हुई थी।हालांकि, केरल के माप्पिला मुस्लिम के लेखक रोलांड ई.मिलर का तर्क है कि अरबी मलयालम करीब 500 साल पुरानी है।

यह भाषाई इतिहास का एक दिलचस्प पहलू है!तमिल से निकटता से जुड़ी मलबार बोली, विभिन्न समूहों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई, जिसमें अरब लोग भी शामिल थे जो इस क्षेत्र में गहराई से शामिल थे।चूंकि मलबार एक प्रमुख मसाला व्यापार केंद्र के रूप में विकसित हुआ, इसलिए अरब व्यापारियों और विद्वानों ने भाषा और संस्कृति पर एक स्थायी प्रभाव छोड़ा।

मलबार लंबे समय तक तमिल शासन के अधीन रहा और लोग तमिल बोलते थे, जो उनकी मातृभाषा और लोकभाषा बन गई।

माप्पिला भाषा और साहित्य

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