केरल में बम्बू राफ्टिंग की बात ही अलग है जहाँ लगता है कि ज़िंदगी की रफ़्तार धीमी हो गई है। इस गतिविधि के दौरान, शोर करने वाली मोटरबोट की जगह, बम्बू राफ्ट पर चढ़कर जंगल की झीलों और जलाशयों को देखने का मौका मिलता है जो कभी-कभी संरक्षित क्षेत्रों के अंदर स्थित होते हैं। यहाँ धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए जंगली जीव-जंतुओं और पक्षियों की आवाज़ों को सुनने, देखने और प्रकृति की सुन्दरता का आनंद लेने का मौका मिलता है।


बम्बू राफ्टिंग काफी हद तक पश्चिमी घाट क्षेत्रों और विशाल वन्यजीव क्षेत्रों का हिस्सा है। पेरियार टाइगर रिज़र्व (तेक्कडी), परम्बिकुलम टाइगर रिज़र्व (पालक्काड़), वायनाड में कर्लाड झील और तिरुवनंतपुरम के पास कोट्टूर-नेय्यार जैसी जगहों पर इस तरह का माहौल देखने को मिल सकता है, जहाँ स्थानीय लोग आम तौर पर सॉफ्ट ट्रेकिंग या नेचर वॉक के साथ इसका भी आयोजन करते हैं। आप सुबह में पतझड़ के जंगल में ट्रेकिंग के लिए निकल सकते हैं, और नाश्ता या लंच करने के बाद, आप राफ्टिंग का आनंद ले सकते हैं।


यहाँ तरह-तरह के जीव-जंतु और पेड़-पौधे देखने को मिलते हैं जिससे आपकी राइड काफी शानदार और मज़ेदार हो जाती है। आपको पानी के किनारे और जंगल में तरह-तरह के जानवर और पक्षी देखने को मिल सकते हैं जैसे हाथी, गौर, सांभर, ऊदबिलाव, जल पक्षी और शिकारी पक्षी| इसके अलावा गाइड्स आपको मार्ग में इनकी आवाज़ों, अलग-अलग रास्तों और तरह-तरह पेड़-पौधों के बारे में भी बताते हैं। वायनाड के कुरुवाद्वीप और कर्लाड झील में बम्बू राफ्ट, पानी पर आसानी से तैरते हैं और वहां जीव-जंतुओं को देखने के साथ-साथ ताज़ी हवा और शांत बैकवॉटर का भी आनंद मिलता है।


आम तौर पर, अक्टूबर से मार्च तक का समय अच्छा समय होता है क्योंकि उस समय तक मानसून खत्म हो जाता है। उस समय तक रास्ते और अधिक स्थिर हो जाते हैं तथा मौसम और ज़्यादा ठंडा हो जाता है| इसके अलावा झील या जलाशय के ऊपर दृश्यता भी बढ़ जाती है। कुछ टाइगर रिज़र्वों और इको-टूरिज़्म सेंटरों में, टाइम स्लॉट (सुबह/पूरा दिन/आधा दिन) फिक्स्ड होते हैं जहाँ साथ में गाइड ले जाना ज़रूरी होता है और समूह का आकार सीमित होता है| इसलिए पहले से रिज़र्वेशन या बुकिंग कर लेना बेहतर होता है।


इनमें से ज़्यादातर जगहें, जंगलों के बीचोबीच में स्थित होते हैं, जहाँ वन/वन्यजीव विभाग या उनकी इको-टूरिज़्म शाखाएं ही मुख्य रूप से कार्यक्रम का संचालन करती हैं जिनके साथ कभी-कभी स्थानीय आदिवासी समुदाय भी शामिल होते हैं। जबकि समूह के आकार, रिपोर्टिंग टाइम, ड्रेस कोड और व्यवहार संबंधी नियम बहुत सख़्त होते हैं, लेकिन फिर भी वे आगंतुकों, वन्यजीव, और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


सुझावों

अपनी सहजता के अनुसार चुनें

अगर आप बच्चों या बुज़ुर्गों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो आपको छोटी झील या जलाशय वाले फ्लोट्स का चयन करना चाहिए। अगर सब लोग लंबी वॉक पर निकल सकते हैं और पूरा दिन बाहर घूम सकते हैं, तभी आपको पूरे दिन वाले पेरियार या परम्बिकुलम कार्यक्रमों का चयन करना चाहिए।

पहले से प्लानिंग कर लें

पेरियार, परम्बिकुलम और नेय्यार–कोट्टूर में राफ्टिंग गतिविधियों के लिए सामान्यतः आधिकारिक इको-टूरिज्म केंद्रों अथवा ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से अग्रिम बुकिंग आवश्यक होती है। निर्धारित रिपोर्टिंग समय आमतौर पर सुबह के समय रखा जाता है।

सबसे पहले सुरक्षा

गाइड के निर्देशों का पालन करें, लाइफ जैकेट को सही ढंग से पहनें और राफ्ट के किनारों पर न झुकें। शांति बनाए रखने, कूड़ा फेंकने और आवागमन से संबंधित जंगल के नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

सही कपड़े पहनें

हल्के, जल्दी सूखने वाले कपड़े पहनने, टोपी पहनने, सनस्क्रीन लगाने, और अच्छी पकड़ वाले वॉकिंग जूते या सैंडल पहनने आपको काफी मदद मिल सकती है, क्योंकि अधिकांश कार्यक्रमों में ट्रेकिंग और राफ्टिंग दोनों शामिल होते हैं।