केरल में लगभग 580 किमी लंबी तटरेखा है। लेकिन, यहाँ स्कूबा डाइविंग भी होती है लेकिन इसके किनारों की लंबाई से इसका कोई लेना-देना नहीं है। इसमें लहरों के नीचे मौजूद चीजों को देखने का आनंद लिया जाता है। क्योंकि लहरों के नीचे भी एक दुनिया होती है जो शांत, धीमी और अनजान होती है। मछलियों के झुंड एक साथ चलते हैं। समुद्र तल से चट्टानें ऊपर उठती हैं। छोटे-छोटे गड्ढों में कोरल या मूंगे दिखते हैं। कभी-कभी, कोई कछुआ या जेलीफ़िश बिना किसी हड़बड़ी के पास से गुज़र जाता है।
और यही तो असली मज़ा है। यहाँ दिखाई देने वाले खूबसूरत नज़ारों के अलावा ये अचानक होने वाली मुलाकातें भी बड़ी मज़ेदार होती हैं। डाइव के दौरान समुद्र के नीचे क्या-क्या दिखाई देगा, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। यही तो असली एडवेंचर है।
वैसे तो यहाँ समुद्र तट पर बस कुछ जगहों पर ही स्कूबा डाइविंग गतिविधियां होती हैं, लेकिन सबसे लोकप्रिय जगहें, तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में स्थित हैं। तिरुवनंतपुरम में कोवलम और वर्कला, लोकप्रिय खुले समुद्री स्पॉट हैं, जबकि कोच्चि के कडवन्त्रा और कलूर थोड़े ज़्यादा नियंत्रित स्पॉट कहलाते हैं। कडमक्कुडी द्वीप पर भी स्कूबा डाइविंग काफी लोकप्रिय है। वहाँ के नज़ारें भी काफी अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, कोवलम में डाइव करने पर रीफ़ मछलियों के झुंड, पानी के नीचे रॉक कैनियन और रेत की क्यारियाँ दिखती हैं, जबकि वर्कला के पास कई सालों में ज्वार के कारण प्राकृतिक ढांचे देखने को मिलते हैं। कोच्चि का समुद्र, अपने विशेष तटीय भूगोल के कारण, एक खास डाइविंग माहौल प्रदान करता है।
गहराई, तराई और दृश्यता के आधार पर हर जगह पानी के अंदर अलग-अलग पृष्ठभूमि दिखाई देती है।
डाइविंग का मौसम आम तौर पर मानसून के बाद अक्टूबर से अप्रैल तक रहता है। इस समय समुद्र काफ़ी शांत होता है, परिस्थितियाँ ज़्यादा स्थिर होती हैं और दृश्यता काफी बेहतर होती है। मानसून के दौरान समुद्र में तूफ़ान और तेज़ लहरों के कारण डाइविंग गतिविधियां रोक दी जाती हैं।
केरल में ज़्यादातर डाइविंग संचालक उन लोगों को परिचयात्मक "ट्राई डाइव" की सुविधा देते हैं जिन्होंने पहले कभी डाइव नहीं की है और लाइसेंस वाले डाइवरों के लिए एडवांस्ड डाइविंग की भी व्यवस्था करते हैं। ये गतिविधियां, पर्यावरण-अनुकूल सुरक्षित समुद्री क्षेत्रों में होती हैं, और संचालकों को पर्यटन और तटीय अधिकारियों के नियमों को का पालन करना पड़ता है। पहले से बुकिंग करना और अपनी मेडिकल स्थिति के बारे में बताना ज़रूरी हो सकता है, खासकर अगर आप और गहराई में डाइव करने या एडवांस्ड डाइविंग कोर्स करने का प्लान बना रहे हैं। इसके अलावा, यह स्कूबा डाइविंग आम तौर पर सिर्फ तभी की जाती हैं जब समुद्र शांत होता है।
अपने आराम और अनुभव स्तर के आधार पर ही डाइव गहराई चुनें।
पहले से प्लान बनाकर रख लें, क्योंकि कुछ डाइव के लिए एडवांस बुकिंग करना या मेडिकल क्लीयरेंस फॉर्म भरना पड़ सकता है।
प्रमाणित प्रशिक्षकों द्वारा दिए गए सभी ज़रूरी सुरक्षा दिशानिर्देशों और निर्देशों का पालन करें।
सुरक्षा और उपकरणों की क्वालिटी को सुनिश्चित करने के लिए हमेशा केरल पर्यटन द्वारा अनुमोदित सेंटरों पर ही डाइविंग करें।