अपने सन्यासी शिष्यों को चुनने में भी गुरु का नज़रिया अलग था। उनके खास त्यागी शिष्यों में शिवलिंगदास स्वामी, भैरव शांति, बोधानंद स्वामी, सत्यव्रत स्वामी, श्री नारायण चैतन्य स्वामी, संथालिंग स्वामी, नटराज गुरु, धर्मतीर्थर, नारायणतीर्थ स्वामी और अर्नेस्ट किर्क शामिल थे।