श्री नारायण गुरु के कामों में समाज सुधार और आध्यात्मिक नेतृत्व का तालमेल साफ़ दिखता है। वे ऐसे तपस्वी थे जिन्होंने भारतीय मंदिर अवधारणा को एक नया परिप्रेक्ष्य दिया। उन्होंने जो मंदिर प्रतिष्ठापन किए और उनके माध्यम से उन्होंने जो विचार रखे, उन्होंने मंदिरों की पारंपरिक अवधारणा को चुनौती दी जो सदियों से मौजूद थी। श्री नारायण गुरु द्वारा प्रतिष्ठापित कुछ मुख्य मंदिर हैं अरुविप्पुरम शिव मंदिर (शिवलिंग प्रतिष्ठापन), कुलत्तूर में कोलत्तुकरा मंदिर, तलश्शेरी में जगन्नाथ मंदिर, कोष़िक्कोड में श्री कंठेश्वर मंदिर, मुरुक्कुमपुष़ा में श्री कालकंठेश्वर मंदिर, शिवगिरी शारदा मठ (शारदा प्रतिष्ठापन), कोट्टार में पिल्लयार गणपति मंदिर, तृश्शूर में कारमुक्कु मंदिर, कलवमकोडम शक्तिश्वरम मंदिर (कण्णाडि (दर्पण) प्रतिष्ठापन), और आलुवा में अद्वैत आश्रम।