केरल रेनेसां का इतिहास सिर्फ़ हिंदू धर्म में सुधारों तक ही सीमित नहीं है। यह पिछड़े समुदायों के अधिकारों के लिए संघर्ष से भी आगे जाता है। श्री नारायण गुरु, अय्यंकाली और वैकुंडा स्वामी सभी समाज के निचले तबके से आए थे। उन्होंने सीधे ब्राह्मणवादी दबदबे को चुनौती दी। अपनी कोशिशों से, वे इंसानी इज़्ज़त को काफ़ी हद तक वापस लाने और ऊपर उठाने में कामयाब रहे।

श्री नारायण गुरु के नैतिक नेतृत्व ने सामाजिक सुधार आंदोलन को मज़बूती दी। इसने सुधारकों और विचारकों को उनके शुरू किए गए संघर्ष को जारी रखने के लिए प्रेरित किया। कोच्चि, मालाबार और त्रावणकोर के शिष्य आगे आए। उन्होंने गुरु के विचारों से प्रेरित होकर यह ज़िम्मेदारी ली। उनमें डॉ. पल्पु, टी. के. माधवन, सहोदरन अय्यप्पन, कुमारन आशान, मूलूर पद्मनाभ पणिक्कर, सी. कृष्णन और मूरक्कोत्त कुमारन जैसे नामी लोग थे।

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