इडुक्की का रामक्कलमेड

 

ठंडी, हरी-भरी पहाड़ियां और ताजी पर्वतीय हवा रामक्कलमेड को अनोखा गंतव्य बनाती है। इस स्थान को यह नाम चट्टान पर अंकित पद-चिह्न की आकृति से मिला है जिसके बारे में मान्यता है कि ये भारतीय महाकाव्य रामायण में वर्णित भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम के चरण-चिह्न हैं।

केरल के इडुक्की जिले में स्थित रामक्कलमेड केरल के एक प्रसिद्ध वन्यजीव गंतव्य तेक्कडी से 40 किमी की दूरी पर है। पश्चिमी घाट में बसे रामक्कलमेड के खूबसूरत पहाड़ नेडुम्कण्डम  से 16 किमी की दूरी पर स्थित हैं।

रामक्कलमेड अपनी पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है और साथ ही पड़ोसी तमिलनाडु राज्य के गावों के मनोरम दृश्यों के लिए भी जो पश्चिमी घाट की पूर्वी बाजू में पड़ते हैं। एक बहुत ऊंची और चट्टानी संरचना जो लगभग 300 की ऊंची है और उसका मुंह पूरब की ओर है, यहां का अन्य आकर्षण है।

यह एशिया के सबसे हवादार स्थलों में एक है और इसलिए यहां आपको एक विंड फार्म देखने को मिलता है जिससे बिजली पैदा होती है और इसका संचालन केरल सरकार द्वारा किया जाता है।

रामक्कलमेड और उसके आस-पास के अन्य आकर्षण हैं फ्रॉग रॉक (मेंढक चट्टान), कछुआ चट्टान और केरल की सबसे ऊंची जुड़वीं प्रतिमा जिनका नाम कुरावन और कुरत्ती है।

यहां पहुंचने के लिए

नजदीकी रेलवे स्टेशन: कोट्टयम, लगभग 124 कि.मी. | नजदीकी एयरपोर्ट: कोच्चिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, लगभग 129 कि.मी. दूर |

अवस्थिति

अक्षांश: 9.800583, देशांतर: 77.242098

District Tourism Promotion Councils KTDC Thenmala Ecotourism Promotion Society BRDC Sargaalaya SIHMK Responsible Tourism Tourfed KITTS Adventure Tourism Muziris Heritage KTIL

टॉल फ्री नंबर: 1-800-425-4747 (केवल भारत में)

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